इश्क़
है इश्क़ तो डर कैसा ज़माने का,
आप अपने यार को इज़हार करके देख लो।
खुसखिसमती है आपकी की है मुक्कमल इश्क़ तो,
वरना इतिहास के पन्ने पलट के देख लो।
निकलती चांदनी देखना है पसंद तो,
तो आप पूनम की शाम का इंतज़ार करके देख लो।
रहते हो बेरंग अपनी इस बेरुखी ज़िन्दगी में,
किसी के संग होली रंग में रंग के देख लो।
ईद मनाने के लिए, जरूरी नही दीदार ऐ चांद
आप अपने यार की सूरत ही देख लो।
रहते हो अंधेरे के जाने किस खयाल में,
आओ अमावस में ओर दीये जला के देख लो।
हो गए हो गुमनाम की आते नही हो छत पे,
तोड़ के सारे दर्द , पतंग उड़ा के देख लो।
, कृतज्ञ दीवान
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