ज़ारी

लड़ाई तो अब भी ज़ारी है मेरी।
पहले तुमको पाने की,
अब तुमको भुलाने की,
पहले इश्क़ में फ़ना हो जाने कि,
अब ज़िन्दगी खुलकर जी जानें कि।
लड़ाई तो अब भी जारी है मेरी।
पहले सबसे तुम्हे छुपाने कि,
अब तन्हाई मिटाने कि,
पहले तुम्हारी उड़ती जुल्फों में खो जाने कि,
अब उन्ही हवाओँ से भिड़ जाने कि,
लड़ाई तो अब भी जारी है मेरी।
पहले बनकर बादल तुमपर बरस जाने कि,
अब ज़िन्दगी से काली घटाएं हटाने कि,
पहले राहो में तुम्हारा साथ पाने कि,
अब उन राहो को कही पीछे छोड़ आने कि,
लड़ाई तो अब भी जारी है मेंरी।
पहले तुम्हारी आँखों मे खो जाने कि,
अब बस चैन से सो जाने कि,
पहले तुम्हे अपना खुदा बनाने कि,
अब खुद की शाख बचाने कि,
पहले तुम्हारे लिए मर जाने कि,
अब फिर से मगरूरी में उठ जाने कि,
लड़ाई तो अब भी जारी है मेरी।
पहले तुमको पाने कि,
अब तुमको भुलाने कि,
लड़ाई अब भी जारी है मेरी।
   कृतज्ञ दीवान..

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